ॐ

भगवद्गीता और ज्योतिष

अठारह अध्याय, मूल संस्कृत, और आपकी अपनी भाषा में व्याख्या, साथ में यह मार्गदर्शिका कि हर अध्याय परंपरा से किन ग्रहों और दशाओं में पढ़ा जाता है।

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वही श्लोक, हर भाषा में

अध्याय 2 · श्लोक 47

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥

karmaṇyevādhikāraste mā phaleṣu kadācana |
mā karmaphalaheturbhūrmā te saṅgo’stvakarmaṇi ||

English

You have a right to action alone, never to its fruits. Do not make the fruit of action your motive, and do not become attached to inaction. This is among the most quoted verses of the Gita: do your best, but do not let the result be the reason you act or the thing that rules your peace.

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हिन्दीHindi

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है, उसके फलों पर कभी नहीं। कर्मफल को अपना हेतु मत बनाओ और अकर्म में भी आसक्त मत हो। यह गीता के सबसे उद्धृत श्लोकों में से है: अपना श्रेष्ठ करो, पर परिणाम को न कर्म का कारण बनने दो, न अपनी शांति का स्वामी।

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ગુજરાતીGujarati

તારો અધિકાર ફક્ત કર્મ પર છે, તેના ફળો પર ક્યારેય નથી. કર્મફળને તારો હેતુ ન બનાવ અને અકર્મમાં પણ આસક્ત ન થા. આ ગીતાના સૌથી વધુ ઉદ્ધૃત શ્લોકોમાંનો એક છે: તારું શ્રેષ્ઠ કર, પણ પરિણામને કર્મનું કારણ ન બનવા દે, ન તારી શાંતિનો સ્વામી.

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తెలుగుTelugu

నీ అధికారం కర్మపైనే, దాని ఫలాలపై ఎప్పుడూ కాదు. కర్మఫలాన్ని నీ ప్రేరణగా చేసుకోకు, అకర్మకు కూడా అంటిపెట్టుకోకు. ఇది గీతలో ఎక్కువగా ఉదహరించే శ్లోకాల్లో ఒకటి: నీ శ్రేష్ఠాన్ని చేయి, కానీ ఫలితాన్ని కర్మకు కారణం కానివ్వకు, నీ శాంతిని శాసించనివ్వకు.

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தமிழ்Tamil

உனக்கு உரிமை செயலில் மட்டுமே, அதன் பலன்களில் ஒருபோதும் இல்லை. செயலின் பலனை உன் நோக்கமாக்காதே; செயலின்மையிலும் பற்று வைக்காதே. இது கீதையில் அதிகம் மேற்கோள் காட்டப்படும் ஸ்லோகங்களில் ஒன்று: உன்னால் முடிந்த சிறந்ததைச் செய், ஆனால் முடிவு உன் செயலுக்குக் காரணமாகவோ உன் அமைதியை ஆள்வதாகவோ ஆகிவிடக்கூடாது.

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മലയാളംMalayalam

നിനക്ക് അധികാരം കർമ്മത്തിൽ മാത്രമാണ്, അതിന്റെ ഫലങ്ങളിൽ ഒരിക്കലുമില്ല. കർമ്മഫലത്തെ നിന്റെ ഉദ്ദേശ്യമാക്കരുത്, അകർമ്മത്തിലും ആസക്തനാകരുത്. ഇത് ഗീതയിൽ ഏറ്റവുമധികം ഉദ്ധരിക്കപ്പെടുന്ന ശ്ലോകങ്ങളിൽ ഒന്നാണ്: നിന്റെ ഏറ്റവും മികച്ചത് ചെയ്യുക, പക്ഷേ ഫലം കർമ്മത്തിന്റെ കാരണമോ നിന്റെ ശാന്തിയുടെ അധിപനോ ആകാൻ അനുവദിക്കരുത്.

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EspañolSpanish

Tienes derecho solo a la acción, nunca a sus frutos. No hagas del fruto el motivo de tu acción, y no te apegues a la inacción. Es uno de los versos más citados de la Gita: haz lo mejor que puedas, pero no dejes que el resultado sea la razón por la que actúas ni lo que gobierne tu paz.

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भोजपुरीBhojpuri

तोहार अधिकार खाली करम पर बा, ओकर फल पर कबो ना। करम के फल के आपन कारन मत बनावऽ आ अकरम में भी लगाव मत करऽ। ई गीता के सबसे जादा कहल गइल श्लोक में से एगो हवे: आपन सबसे बढ़िया करऽ, बाकिर नतीजा के ना करम के कारन बने दऽ, ना आपन सांति के मालिक।

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मैथिलीMaithili

अहाँक अधिकार मात्र कर्म पर अछि, ओकर फल पर कहियो नहि। कर्मफलकेँ अपन हेतु नहि बनाउ आ अकर्ममे सेहो आसक्त नहि होउ। ई गीताक सभसँ उद्धृत श्लोक सभमेसँ एक अछि: अपन श्रेष्ठ करू, मुदा परिणामकेँ ने कर्मक कारण बनऽ दिअ, ने अपन शांतिक स्वामी।

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अठारह अध्याय

श्लोक पारंपरिक संस्कृत पाठ हैं। व्याख्याएँ मौलिक सारांश हैं, किसी विशेष अनुवादक के शब्द नहीं। ज्योतिष मार्गदर्शिका एक भक्ति और चिंतन का अभ्यास है, भविष्यवाणी नहीं और न ही पेशेवर सलाह का विकल्प।

अध्याय 1

अर्जुनविषादयोगः

अर्जुनविषादयोग 47 श्लोक शनिराहु ✓ 7
अध्याय 2

साङ्ख्ययोगः

सांख्ययोग: आत्मा और ज्ञान 72 श्लोक सूर्यगुरु ✓ 7
अध्याय 3

कर्मयोगः

कर्मयोग 43 श्लोक मंगल ✓ 7
अध्याय 4

ज्ञानकर्मसंन्यासयोगः

ज्ञानकर्मसंन्यासयोग 42 श्लोक मंगल ✓ 7
अध्याय 5

कर्मसंन्यासयोगः

कर्मसंन्यासयोग 29 श्लोक चंद्रशनि ✓ 7
अध्याय 6

ध्यानयोगः

ध्यानयोग 47 श्लोक चंद्रशनि ✓ 7
अध्याय 7

ज्ञानविज्ञानयोगः

ज्ञानविज्ञानयोग 30 श्लोक केतु ✓ 7
अध्याय 8

अक्षरब्रह्मयोगः

अक्षरब्रह्मयोग 28 श्लोक शनि ✓ 7
अध्याय 9

राजविद्याराजगुह्ययोगः

राजविद्याराजगुह्ययोग 34 श्लोक गुरु ✓ 7
अध्याय 10

विभूतियोगः

विभूतियोग 42 श्लोक गुरु ✓ 7
अध्याय 11

विश्वरूपदर्शनयोगः

विश्वरूपदर्शनयोग 55 श्लोक राहु ✓ 7
अध्याय 12

भक्तियोगः

भक्तियोग 20 श्लोक शुक्रचंद्र ✓ 7
अध्याय 13

क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगः

क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग 35 श्लोक ✓ 7
अध्याय 14

गुणत्रयविभागयोगः

गुणत्रयविभागयोग 27 श्लोक ✓ 7
अध्याय 15

पुरुषोत्तमयोगः

पुरुषोत्तमयोग 20 श्लोक बुधगुरु ✓ 7
अध्याय 16

दैवासुरसम्पद्विभागयोगः

दैवासुरसम्पद्विभागयोग 24 श्लोक सूर्यमंगल ✓ 7
अध्याय 17

श्रद्धात्रयविभागयोगः

श्रद्धात्रयविभागयोग 28 श्लोक ✓ 7
अध्याय 18

मोक्षसंन्यासयोगः

मोक्षसंन्यासयोग 78 श्लोक ✓ 7

ज्योतिष पठन मार्गदर्शिका

कौन-सा अध्याय, कब:

  • साढ़ेसाती / शनि महादशा: अध्याय 1, अध्याय 2
  • राहु या केतु महादशा: अध्याय 7, अध्याय 11
  • कमज़ोर सूर्य या मंगल (कम ऊर्जा या एकाग्रता): अध्याय 16
  • रुका हुआ धन / आठवें भाव की बाधाएँ: अध्याय 14

ग्रह और दशा के अनुसार अध्याय आपकी दशा के लिए गीता